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  • मंत्रौषधि स्वर्णप्राशनं / Mantroushadhi Swarnprashanam (प्रतिदिन देने के अनुसार कम से कम 5 आर्डर करें – बार बार मंगवाने के खर्च से बचने हेतु) )

    *कश्यपसंहिता में वर्णित 3 हज़ार वर्ष पुराना 
    आयुर्वेदिक टीकाकरण – स्वर्णप्राशन*

     

    • बालक की रोगप्रतिकार क्षमता बढती है
    • बालक के शारीरिक विकास में सकारात्मक गति लाता हैबालक के शारीरिक विकास में सकारात्मक गति लाता है
    • यह स्वर्णप्राशन स्मरणशक्ति और धारणशक्ति (grasping ability) बढाने वाले कई महत्वपूर्ण औषध से बना है।
    • पाचनक्षमता बढाता है
    • शारीरिक और मानसिक विकास के कारण वह ज्यादा चपल और बुद्धिमान बनता है।
    • स्वर्णप्राशन मेधा (बुद्धि), अग्नि ( पाचन अग्नि) और बल बढानेवाला है।
    • यह आयुष्यप्रद, कल्याणकारक, पुण्यकारक, वृष्य (पदार्थ जिससे वीर्य और बल बढ़ता है),
    • वर्ण्य (शरीर के वर्ण को तेजस्वी बनाने वाला) और ग्रहपीडा को दूर करनेवाला है
    • स्वर्णप्राशन के नित्य सेवन से मेधायुक्त बनता है श्रुतधर (सुना हुआ सब याद रखनेवाला) बनता है, अर्थात उसकी स्मरणशक्त्ति अतिशय बढती है।
    • Strong immunity Enhancer 
    • Ensures Physical development
    • Memory Booster
    • Makes child positively active and Intellect
    • Increased Digestive Power
    200.00
  • Calcium Drops – मंत्रौषधि कैल्शियम बूँद – 15 ml

    बाजार के चूने से कई गुना शुद्ध एवं गुणकारी

    गुणधर्म:

    • कैल्शियम की कमी को दूर करें
    • दांतो और हड्डियों को मज़बूत करें
    • नाख़ून की वृद्धि होती है
    • बच्चो और गर्भवती महिलाओ के लिए विशेष रूप से लाभदायक
    • शरीर में अस्थि धातु को संतुलित एवं स्थिर कर दर्द में लाभ करता है
    • इसके निर्माण में गंगाजल का प्रयोग किया गया है जिससे यह कई महीनो तक सुरक्षित रहता है

    शास्त्रोक्त महत्त्व:

    आयुर्वेद में 7 धातुओं में अस्थि नमक एक धातु होती है जिस से हड्डियों का और दांतो का निर्माण होता है।

    अस्थि धातु को पोषण देने के लिए आयुर्वेद में मोती के चूने का महत्त्व बताया गया है जो एक विशेष प्रकार का चूना होता है।

    साधारण चूने से पथरी होने की सम्भावना होती है परन्तु मोती के चूने से वह सम्भावना नहीं है।

    इस उत्पाद में मोती के चूने के साथ प्रवाल भस्म, गोदन्ती भस्म, कपर्दिका भस्म का मिश्रण कर यह ड्रॉप्स बनाई गई है।

    150.00
  • New Immunity Booster: Tulsi- Giloy Concentrate / मंत्रौषधि तुलसी- गिलोय अर्क बूँद (15 ml) – Now with Giloy

    New Immunity Booster now with Giloy
    जन्म के 1 वर्ष से 100 वर्ष तक प्रतिदिन सेवनीय

    उपयोग: सर्दी, खांसी, बुखार के लिए तथा रोग प्रतिरोधक शक्ति बढ़ाने के लिए

    राम तुलसी, श्याम तुलसी, वन तुलसी एवं गिलोय युक्त

    160.00
  • Mashtishk Rog Nashini / मस्तिष्क रोग नाशिनी (with Glass Dropper)

    यह मस्तिष्क से सम्बंधित रोगों के लिए लाभकारी है |

    It is beneficial for diseases related to the brain.

     

    बाहरी उपयोग में लाने हेतु निर्मित (नासिका)

    Made for external use in nostrils

     

    पंचगव्य बूंद औषध (नासिका) बाहरी उपयोग के लिए उपयोगी, दर्द में इससे मालिश भी कर सकते है

    1. यह सिर से गले तक के रोगों में लाभकारी है।
    2. इस घृत को दोनों नथुनों में थोड़ा सा लगाकर घर से बाहर निकलने पर अनेकों जीवाणु/विषाणुओं से बचने में सहायता मिलेगी।
    3. बताए गए उपरोक्त लाभों के अतिरिक्त भी अनेकों अन्य अनगिनत लाभ हैं।
    180.00
  • Vishisht Netra Sudha (Dropper) / विशिष्ट नेत्र सुधा – Packed in glass bottle with glass dropper

    विशेष नक्षत्र के गोमूत्र में बनी नेत्र विकारो में लाभदायक

    Made out of Gomutra collected on a special day of year when the medicinal properties of gomutra are at its peak.

    It is beneficial for all kinds of eye diseases

     

    बाहरी उपयोग में लाने हेतु निर्मित ( आँख )

    Made for external use only (eyes)

     

    पंचगव्य बूंद औषध (नेत्र) नेत्र रोग के लिए लाभकारी

    1. इसे दोनों नेत्रों में 1 – 1 बूंद डाल सकते है
    2. इसे डालने के बाद 3 मिनट तक आंखे बंद रखें, फिर धीर
    3. इसे आँखों में डालने का उपुक्त समय सुबह 9 बजे, 3 बजे और रात्रि शयन के पूर्व है
    75.00
  • Nabhi Sudha / नाभि सुधा (Drop for navel problems)

    यह नाभि सम्बंधित रोगों के लिए लाभकारी है

    1. नाभि को अपने स्थान पर लाने में सहायक
    2. त्वचा में चमक आती है
    3. शरीर की कमज़ोरी दूर करने में सहायक
    4. नाभि सुधा नाभि में लगाने से घुटनो के दर्द में लाभ मिलता है
    5. बालो के स्वास्थ्य में वृद्धि
    180.00
  • Mashtishk Rog Nashini मस्तिष्क रोग नाशिनी (New Refill pack)

    पंचगव्य घृत युक्त नासिका का रिफिल पैक

    यह मस्तिष्क से सम्बंधित रोगों के लिए लाभकारी है |

    It is beneficial for diseases related to the brain.

     

    बाहरी उपयोग में लाने हेतु निर्मित (नासिका)

    Made for external use in nostrils

     

    पंचगव्य बूंद औषध (नासिका) बाहरी उपयोग के लिए उपयोगी, दर्द में इससे मालिश भी कर सकते है

    1. यह घृत में बना है अत: यदि जमा हुवा है तो बोतल को गर्म जल में डूबकर गुनगुना कर लें और पूर्णतः तरल हो जाने पर ही प्रयोग करें
    2. नाक के दोनों छिद्रों (नासिका) में 2 से 3 बूंद डाल सकते है (उपयूक्त समय सुबह 11 बजे और रात्रि शयन से पूर्व है)
    3. मूलाधार में ¼ चम्मच लगा सकते है (उपयुक्त समय प्रातःकाल और सायंकाल मल त्यागने के बाद अंगुली डालकर गुदाद्वार पर अंदर तक लगाए।
    150.00
  • Karn Rog Nashini Dropper – कर्ण रोग नाशिनी बूँद

    यह कर्ण के सभी रोगों के लिए लाभकारी है |

    It is beneficial for all kinds of ear diseases.

     

    बाहरी उपयोग में लाने हेतु निर्मित ( कर्ण  )

    Made for external use only (ears)

     

    पंचगव्य बूंद औषध (कर्ण) कान रोग के लिए लाभकारी

    1. इसे दोनों कानों में 1 से 2 बूंद डाल सकते है
    2. एक कान में डालने के बाद 10 मिनट तक उसी करवट में लेटे रहें
    3. इसके बाद ही दूसरी कान में डालें
    4. डालने का उपयुक्त समय सुबह 9 बजे और सायंकाल 4 बजे है
    5. इसे डालने के बाद प्रतिदिन रात्रि में सोने से पूर्व सूती कपडे से कान की सफाई करे
    40.00
  • मंत्रौषधि जल शुद्धि बूँद / Water Purifier Drops : RO का आयुर्वेदिक विकल्प (30ml)

    RO का आयुर्वेदिक विकल्प

     

    मंत्रौषधि जल शुद्धि बूँद / Water Purifier Drops – for IDEAL pH

     

    आयुर्वेद के प्राचीन ग्रंथो में जल को शुद्ध करने के लिए विभिन्न औषधियों का वर्णन किया गया है ।

    जल को शुद्ध करनेवाली विभिन्न औषधियाँ प्रायः नदी के किनारे पर होती है और ऐसी औषधियों में निर्मलीबीज, नागरमोथ, केतकी इत्यादि मुख्य है ।

    इस प्रकार की औषधियाँ को मिश्रित करके गंगाजल में मिलाकर-गोमय भस्म का संयोजन करके विशिष्ट पद्धति से यह ड्रॉप्स बनाये जाते है ।

    फिटकरी का उपयोग होने से तो विशेष प्रभावी होता है ।

     

    प्रति 30 ml में घटक:

    1. निर्मली बीज
    2. मोरिंगा पत्ते
    3. कमल की जड़
    4. मोती का चूना
    5. फिटकरी
    6. हल्दी
    7. कढ़ी पत्ता
    8. तुलसी
    9. स्पिरुलिना  शैवाल
    10. अग्निहोत्र भस्म
    11. गंगा जल

    लाभ :

    • फिटकरी कचरे को नीचे बिठाता है ।
    • पानी में ऑक्सीजन की मात्रा को बढ़ाता है ।
    • पानी से होनेवालें रोगों से बचाता है ।
    • पानी को पचने में हल्का बनाता है ।
    • गंगाजल से पानी शुद्ध एवं पवित्र होता है ।
    • मोरिंगा पानी को शुद्ध करता है तथा पानी में प्राण को बढ़ाता है ।
    • Spiriluma एक प्रकार का शैवाल है, जो पानी को ऊर्जायुक्त करता है ।
    • पानी को शुद्ध करने तथा Ph Value बढाने के लिए मोती के चूने का भी उपयोग किया जाता है ।
    60.00
  • Netra Bindu Ghrit / नेत्र बिंदु घृत (Dropper)

    • यह नेत्र सम्बन्धी  विकारो के लिए लाभकारी है |
    • आँखों में उपस्थित lacrimal glands को सक्रीय रखता है और आँखों में उष्णता को रोकता है!
    • इसका शीतलता का गुण आँखों को लम्बे समय तक कार्य करना के कारण हुई थकान को दूर रख ताज़ा रखता है।
    200.00
  • Memory Power Oil / मंत्रौषधि स्मृति वर्धक तैलम – 30ml

    स्मृति वर्धक तैलम

    कृत्रिम रसायन एवं प्रेज़रवेटिव रहित
    दुष्प्रभाव रहित

    गुण:

    • स्मरण एवं मस्तिष्क की शक्ति को बढ़ाता है
    • सर्दी खांसी एवं सरदर्द में भी लाभकारी
    • इसे नस्य की तरह भी प्रयोग किया जा सकता है (सरदर्द हेतु दोनों नाक में एक-एक बूँद डालें)

    उपयोग:

    • 3 -10 वर्ष की आयु को 3 बूँद
    • 10 वर्ष से ऊपर की आयु को 5 बूँद पतासा या दूध के साथ प्रतिदिन सुबह और शाम सेवन करें

    घटक:
    ज्योतिष्मती तेल
    ब्राह्मी
    शंखपुष्पी
    जटामांसी
    अश्वगंधा
    वज
    पंचगव्य एवं ब्राह्मी घृत युक्त

     

    200.00
  • Mantroaushadhi Garbh Swarnprashanam – मंत्रौषधि गर्भ स्वर्णप्राशनम – गर्भावस्था हेतु विशेष – Specially for Pregnant Ladies (30ml)

    मंत्रौषधि गर्भ स्वर्णप्राशनम
    ******************
    शंखपुष्पी
    पिप्पली
    जटामंसी
    वज
    ब्राह्मी
    पंचगव्य घृत
    शहद
    स्वर्णभस्म और फल घृत युक्त

    गर्भ का रक्षण, पोषण एवं विकास करता है। गर्भिणी को सबल एवं स्वस्थ बनाता है

    मात्रा : 7 से 10 बूँद प्रतिदिन सुबह खाली पेट सेवन करें

    *************************

    गर्भावस्था में सुवर्ण की विशेष आवश्यक्ता होती है क्योंकि गर्भस्थ शिशु के मस्तिष्क के सम्पूर्ण विकास के लिए सुवर्ण बहुत आवश्यक है ।

    गर्भस्थ शिशु का शरीर अविरत विकसित होता रहता है तथा पाँचवें, छठ्ठेऔर सातवें महीने में मन-बुद्धि-ओज का विकास होता है । उस समय गर्भ सुवर्णप्राशनम् विशेष रुप से प्रभावी होता है । यह सुवर्णप्राशन फल घृतम् द्वारा process करके बनाया जाता है ।

    सम्पूर्ण भारत में केवल गुरुजी ने अपनी विशेष formula के आधार पर बनाकर यह अनेक गर्भवती महिलाओं को दिया गया है और इससे गर्भ के विकास में अनेक लाभ पाये गये हैं। जैसे शिशु की बुद्धि एवं मन का विकास, मस्तिष्क का विकास, कफ-वात-पित्त का संतुलन होना तथा बच्चों की प्रकृति स्वस्थ करने में बहुत लाभदायक सिद्ध होता है ।

     

    500.00

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