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स्वर्णप्राशन आरम्भ करने का अगला शुभ

पुष्यनक्षत्र: 08 अगस्त

To know All about

Swarnprashan

  • Calcium Folic Acid (Veg) Capsules – कैल्शियम एवं फॉलिक एसिड (शाकाहारी) कैप्सूल – 30 Capsules

    कैल्शियम कैप्सूल

    महिला एवं पुरुष सभी के सेवन योग्य

    (महिलाओ के लिए फॉलिक एसिड का भी अच्छा स्त्रोत)

    कैल्शियम की कमी में अत्यंत लाभकारी

    हड्डी एवं दाँतो को मज़बूत करें

    कपर्दिका भस्म
    प्रवाल भस्म
    गोदन्ती भस्म
    संगजराहट भस्म
    मोती का चूना
    अमलकी रसायनं

    सेवन: एक या दो कैप्सूल दिन में तीन बार

    150.00240.00
  • Baby Massage Ayurvedic Oil / बला अश्वगंधादि मालिश तैलम – 100ml

    21 शुद्ध आयुर्वेदिक तत्वों का शुद्ध मालिश हेतु तेल

    घटको की सूची के लिए चित्र देखें

    150.00
  • बाल रक्षा औषधी: केश तेल / Ayurvedic Hair Oil – 100m

    एक दिन के बालक से लेकर सभी आयु के लोगो के लिए उपयोगी

    तेल एक गुण अनेक

    घटक:

    • तिल तेल
    • नारियल तेल
    • बादाम तेल
    • एरंड तेल
    • ब्राह्मी
    • शंखपुष्पी
    • गुलाब
    • चन्दन
    • भृंगराज
    • त्रिफला
    • गोदुग्ध
    • अजा दुग्ध
    • जटामांसी
    • गुंजा
    • बोदर
    • नीली
    120.00
  • Garbh Poshak Syrup / गर्भ पोषक सिरप – 200ml

    गर्भ पोषक सिरप

    गर्भावस्था में 1 से 9 महीने तक सेवनीय

    मात्रा: प्रतिदिन 2 – 2 चम्मच दिन में तीन बार भोजन के बाद सेवन करें

    जीवंती, शतावरी, शतपुष्पा जैसी गर्भ पोषक औषधियों का क्वाथ करके यह syrup बनाया जाता है । यह Chemical processed शुगर (चीनी) के बदले प्राकृतिक खड़ी शक्कर से बना संभवतः भारत का सर्व प्रथम सिरप है ।

    इस syrup के नियमित सेवन से गर्भ का विकास एवं पोषण होता है एवं गर्भावस्था में होनेवाली विविध समस्याओं से मुक्ति मिलती है । इसका स्वाद अच्छा होने के कारण यह आसानी से लिया जा सकता है । इससे उल्टी इत्यादि की समस्या नहीं होती है

    120.00
  • Ayurvedic Mouth Cleaner / मंत्रौषधि आयुर्वेदिक माउथ क्लीनर – 100ml – (गंगाजल से बना)

    गंगाजल से बना सर्वप्रथम मंत्रौषधि आयुर्वेदिक माउथ क्लीनर

     

    कृत्रिम रसायन एवं प्रेज़रवेटिव रहित
    दुष्प्रभाव रहित

    आयुर्वेद के ग्रंथो में दांतो, मसूड़ों एवं मुख शुद्धि के लिए मुख में लार ग्रंथियों जी उत्तेजित करके

     

    मुख का चिकनापन दूर करने के लिए विविध औषधियाँ बताई गई है जैसे बबूल, कर्पूर, बकुल, पंचवालकल क्वाथ

     

    जैसी सभी औषधियों का मिश्रण करके शास्त्रीय पद्धति से बनाया गया है, प्रतिदिन दंतमंजन करने के पश्चात इसके

     

    द्वारा कुल्ला करने से लाभ मिलता है 

     

    Bharat’s first mouth cleaner made from Gangajal

     

    No Artificial Preservatives, Flavor or additives

    60.00
  • Garbhaposhak Churn / गर्भपोषक चूर्ण – 100 gm

    गर्भ के संपूर्ण पोषण के लिए 

    गर्भवती स्त्री एवं शिशु दोनों को पोषण करता है यह माँ एवं शिशु के लिए आयरन एवं कैल्शियम का बहुत उत्तम स्त्रोत है 

    This medicinal churna or powder is made with various pregnancy nutrition ayurvedic medicines. The womb gets rich nutrition. It is a very good source of calcium and iron to the mother as well as and specially to the child during pregnancy.

    घटक:

    शतावरी, शतपुष्प, गोदन्ती, जीवन्ति, शंखपुष्पी, विदारीकंद,  काशिश भस्म, रोप्य भस्म, यष्टिमधु, अश्वगंधा

    शास्त्रोक्त महत्त्व:

    गर्भ में भ्रूण सहज गति से विकसित होता है जिसे सहयोग करने हेतु आयुर्वेद में कई प्रकार की औषधीय योग है जिनका प्रयोग गर्भ को सुदृढ़ एवं स्वस्थ बनाने हेतु प्रयोग किया जाता है

    सेवन:

    एक छोटी चम्मच चूर्ण को दूध के साथ प्रातः एवं सांयकाल में लेना है (केवल गर्भवती स्त्री द्वारा ही सेवन हेतु)

    200.00
  • Memory Power Oil / मंत्रौषधि स्मृति वर्धक तैलम – 30ml

    स्मृति वर्धक तैलम

    कृत्रिम रसायन एवं प्रेज़रवेटिव रहित
    दुष्प्रभाव रहित

    गुण:

    • स्मरण एवं मस्तिष्क की शक्ति को बढ़ाता है
    • सर्दी खांसी एवं सरदर्द में भी लाभकारी
    • इसे नस्य की तरह भी प्रयोग किया जा सकता है (सरदर्द हेतु दोनों नाक में एक-एक बूँद डालें)

    उपयोग:

    • 3 -10 वर्ष की आयु को 3 बूँद
    • 10 वर्ष से ऊपर की आयु को 5 बूँद पतासा या दूध के साथ प्रतिदिन सुबह और शाम सेवन करें

    घटक:
    ज्योतिष्मती तेल
    ब्राह्मी
    शंखपुष्पी
    जटामांसी
    अश्वगंधा
    वज
    पंचगव्य एवं ब्राह्मी घृत युक्त

     

    200.00
  • Mantroaushadhi Garbh Swarnprashanam – मंत्रौषधि गर्भ स्वर्णप्राशनम – गर्भावस्था हेतु विशेष – Specially for Pregnant Ladies (30ml)

    मंत्रौषधि गर्भ स्वर्णप्राशनम
    ******************
    शंखपुष्पी
    पिप्पली
    जटामंसी
    वज
    ब्राह्मी
    पंचगव्य घृत
    शहद
    स्वर्णभस्म और फल घृत युक्त

    गर्भ का रक्षण, पोषण एवं विकास करता है। गर्भिणी को सबल एवं स्वस्थ बनाता है

    मात्रा : 7 से 10 बूँद प्रतिदिन सुबह खाली पेट सेवन करें

    *************************

    गर्भावस्था में सुवर्ण की विशेष आवश्यक्ता होती है क्योंकि गर्भस्थ शिशु के मस्तिष्क के सम्पूर्ण विकास के लिए सुवर्ण बहुत आवश्यक है ।

    गर्भस्थ शिशु का शरीर अविरत विकसित होता रहता है तथा पाँचवें, छठ्ठेऔर सातवें महीने में मन-बुद्धि-ओज का विकास होता है । उस समय गर्भ सुवर्णप्राशनम् विशेष रुप से प्रभावी होता है । यह सुवर्णप्राशन फल घृतम् द्वारा process करके बनाया जाता है ।

    सम्पूर्ण भारत में केवल गुरुजी ने अपनी विशेष formula के आधार पर बनाकर यह अनेक गर्भवती महिलाओं को दिया गया है और इससे गर्भ के विकास में अनेक लाभ पाये गये हैं। जैसे शिशु की बुद्धि एवं मन का विकास, मस्तिष्क का विकास, कफ-वात-पित्त का संतुलन होना तथा बच्चों की प्रकृति स्वस्थ करने में बहुत लाभदायक सिद्ध होता है ।

     

    500.00
  • Garbh Poshak (Veg) Capsule / गर्भ पोषक (शाकाहारी) कैप्सूल – 30 Capsules

    गर्भावस्था में 1 से 9 महीने तक सेवनीय

    नागकेशर, बंगभस्म आमलकी, यष्टिमधु, विहारीकंद, शतावरी,

    *************

    आयुर्वेद में गर्भ और गर्भीणी दोनों का स्वास्थ्य अच्छा रह सके उसके लिए बहुत सारे उपाय बताये गए हैं । आयुर्वेद के ग्रंथो में, प्रतिमाह गर्भावस्था में गर्भ का विकास होता रहे और साथ-साथ गर्भीणी का स्वास्थ्य भी बना रहे इसलिए विभिन्न औषधियाँ बताई गई है, जैसे की शतावरी, विदारीकंद, नागकेसर जैसी औषधियाँ गर्भ का पोषण कारके गर्भस्थ शिशु के सर्व अंगो का विकास करती है और साथ-साथ गर्भीणी को शारीरिक एवं मानसिक शक्ति प्रदान करती है । वर्षों के संशोधन कार्य के बाद चिकित्सा में उपयुक्त “गर्भपोषक कैप्सूल” हमारे संस्कृति गर्भसंस्कार केन्द्र में बहुत लाभप्रद सिद्ध हुई है ।

    यह गर्भावस्था में प्रत्येक महीने में गर्भ का विकास तथा गर्भीणी के स्वास्थ्य का रक्षण करता है ।

    ब्राह्मी, शंखपुष्पी, जटामासी, जैसी औषधियों से गर्भीणी का मन शांत होकर गर्भस्थ शिशु का मानसिक विकास होता है ।

    यष्टिमधु, शतावरी जैसी औषधियों से गर्भीणी तथा गर्भ दोनों को पोषण मिलता है । गर्भावस्था में शक्ति प्रदान करता है, तथा कमजोरी को दूर करता है ।

    नागकेसर गर्भ का पोषण करता है और शक्ति संरक्षण का कार्य करता  है । गर्भावस्था में गर्भस्त्राव तथा गर्भपात होने से बचाता है ।

    अश्वगंधा, विदारी कंद जैसी औषधियाँ शक्ति का संचार करके अशक्ति को दूर करती है ।

    “गर्भपोषक कैप्सूल” गर्भाशय को मजबूत करती हैऔर बार-बार होनेवालें गर्भपात को रोकती है ।

    गर्भावस्था में होनेवालें विकारो या तकलीफों में भी लाभदायी है ।

     

    150.00200.00
  • Mantroaushadhi Pain Killer Drops – मंत्रौषधि पेन किलर बूँद – 15ml

    मंत्रौषधि पेन किलर बूँद
    80 वात रोग, औषधि एक

    दुष्प्रभाव रहित

    उपयोग: जोड़ो के दर्द, वात रोग, माहवारी के दर्द, मधुमेह एवं रक्तचाप के रोगो में लाभदायक

    सेवन: 3 – 5 बूँद आधे गिलास पानी में , दिन में दो या तीन बार

    घटक:
    कलौंजी तेल
    ज्योतिष्मती तेल
    निर्गुन्डी तेल
    रसना
    गुगुल
    त्रिफला
    हल्दी

    150.00
  • GarbhPoshak Prashan (With Phal Ghrit) / गर्भ पोषक प्राशनम्  (फल घृत सहित) – 500gm

    गर्भ पोषक प्राशनम्  (फल घृत सहित)

    आयुर्वेद में बताई गई यह विभिन्न औषधियों, जैसे नागकेशर, बंगभस्म आमलकी, यष्टिमधु, विहारीकंद, शतावरी इत्यादि का संयोजन करके विशेष अवलेह बनाया जाता है, जो गर्भवती महिला एवं शिशु दोनों का संरक्षण करता है ।

    गर्भावस्था में 1 से 9 महीने तक सेवनीय

    आयुर्वेद में बताई गई यह विभिन्न औषधियों, जैसे ब्राह्मी, शंखपुष्पी, शतावरी इत्यादि का संयोजन करके विशेष अवलेह बनाया जाता है, जो गर्भवती महिला एवं शिशु दोनों का संरक्षण करता है ।

    Garbh Poshak Prashan: Ayurvedic Immunity Booster for Pregnant Ladies. Only pure Desi Gomata ghee is used in preparing this rasayana, instead of using any fat based ghee.

    500.00
  • Vaat Rog Har Syrup / मंत्रौषधि वात रोग हर सिरप – 200ml

    लाभ: वात रोग जनित दर्द से आराम हेतु

    सेवन: बच्चो के लिए : 1 चम्मच दिन में तीन बार
    बड़ो के लिए:   2 चम्मच दिन में तीन बार या चिकित्सक का परामर्शानुसार

    120.00

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