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स्वर्णप्राशन आरम्भ करने का अगला शुभ

पुष्यनक्षत्र: 01 जुलाई

  • Matru Care Syrup (After Delivery) / मातृ केयर सिरप (प्रसूति के बाद सेवनीय)- (200ml)

    प्रसूति के बाद सेवनीय

    मातृ केयर सिरप

    खांड से निर्मित
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    घटक: (प्रति 200 ml)

    • दशमूल क्वाथ – 20%
    • देवदारवादी क्वाथ – 20%
    • मेथी दाना  – 20%
    • सतपुष्पा – 20%
    • सूंठी – 20%
    लाभ :
    • प्रसूति पश्चात गर्भाशय को शुद्ध करें
    • माता के दूध को बढ़ाने में सहायक
    • प्रसूता के लिए उपयोगी एवं प्रसूति पश्चात के दर्द से बचाएँ
    उपयोग: 

    प्रसूतावस्था के बाद 3 महीने तक दिन में तीन बार (प्रातः, दोपहर, सांय) 2 चम्मच सेवन करें

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    To be used after delivery

    Matru Care Syrup

    Each 200ml Contains:

    • Dashmool Kwath- 20%
    •  Devdarvadi Kwath – 20%
    • Methi Dana- 20%
    • Satpushpa- 20%
    • Soonthi – 20%
    Benefits:
    • Purifies Uterus after delivery
    • Increase lactation in mothers post delivery
    • Useful in pain caused due to delivery.

     

    Usage –

    Take 2 teaspoon syrup three times a day (Morning-Afternoon-Evening)

     

  • Shakti Vardhak Syrup/शक्ति वर्धक सिरप 200ml

    Description

    CONTAINS  :

    Ashvagandha: 25 mg

    Shatavari: 25 mg

    Vidarikand: 25 mg

    Kaucha: 25 mg

    Amla: 25 mg

    Galo: 25 mg

    Gokharu: 25 mg

    Lindi Piper: 15 mg

    लाभ :

    • अश्वगंधा बल्य, ब्रुहण, रसायन एवं उत्तम वृष्य है । आयुर्वेद मॆं इसके शक्तिवर्धक गुण की महत्ता बताते हुए कहा है कि यह अश्व की तरह ताकतवर बनाता है ।
    • शतावरी को आयुर्वेद में जड़ीबूटी की रानी कहा है । यह शरीर के क्षय और दुर्बलता को मिटाता है एवं स्त्रियों के लिए उत्तम शक्तिवर्धक है ।
    • विदारी कंद बल्य, ब्रुहण, व्रुश्य और रसायन है । यह बच्चों एवं स्त्री-पुरुषों के शरीर को पुष्ट, शक्तिशाली और सुडौल बनाता है ।
    • कौचा उत्तम शुक्रवर्धक, बल्य, ब्रुहण और व्रुष्य है । यह क्रुशता, क्षय, धातुक्षीणता और दुर्बलता को मिटाता है ।
    • पिप्पली एक उत्तम योगवाही औषधि है । यह सभी औषधियों से मिलकर उसके गुणों में अभिवृद्धि करती है ।
    • गुडुची, गोखरु और आँवला यह तीनों औषधि मिलकर रसायन चूर्ण बनता है । यह एक उत्तम टॉनिक है । यह तीनों दोषो का शमन करके शरीर की समस्त धातुओं की पुष्टी करता है एवं वृद्धावस्था को दूर करता है ।
    • ‘शक्तिवर्धक सिरप’ शरीर की तमाम प्रकार की दुर्बलता दूर करके सभी धातुओं को प्राकृतिक रुप से शक्ति प्रदान करता है, जो स्थिर रुप से बनी रहती है ।

    सेवनविधि :

    सुबह-दोपहर-शाम भोजन के बाद २-२ चम्मच समभाग पानी के साथ लें ।

    सेवनयोग्य व्यक्ति :

    १ साल से अधिक आयुवाला कोई भी व्यक्ति इसका सेवन कर सकता है ।

  • Liv Raksha Syrup/लिव रक्षा सिरप 200ml

    Description

    CONTAINS  : Each 5 ml

    Plihari: 0.02 gm

    Punarnava:0.02 gm

    Vidang: 0.02 gm

    Guldana: 0.02 gm

    Kasni: 0.02 gm

    Arjun: 0.02 gm

    Pippali: 0.01 gm

    Lohasav: 0.06 gm

    लाभ :

    • अर्जुन रक्त में से विषैले तत्त्वों को दूर करके रक्त की शुद्धि करता है और यकृत को कार्य में सहायता करता है ।
    • पुनर्नवा यकृत एवं प्लीहा के शोथ को दूर करती है और उसे नयी शक्ति प्रदान करती है ।
    • कासनी पित्तसारक, कटुपौष्टिक और anti oxidant गुण से युक्त है, जो यकृत को शक्ति प्रदान करती है और साथ-साथ मद्यपान के कारण होनेवाले नुकसान से यकृत को सुरक्षित रखती है ।
    • लोहासव शरीर में रक्त और चयापचय की क्रिया को बढ़ाकर शरीर को नयी शक्ति प्रदान करती है ।
    • विभिन्न शारीरिक प्रक्रियाओं में उपयुक्त विविध स्त्रावों की उत्त्पति करके चयापचय की क्रिया में सहायता करती है ।
    • पाचक रस का स्त्राव करके पाचनशक्ति बढ़ाकर अजीर्ण, अग्निमांद्य, अरुची आदि को दूर करके भूख बढ़ाती है ।
    • यकृत को शक्ति देकर उसके कार्यों में सहायता करती है और यकृतशोथ, कामला, यकृतवृद्धि आदि बीमरियों को ठीक करती है ।

    सेवनविधि :

    बच्चो के लिए सुबह-दोपहर-शाम भोजन के बाद १-१ चम्मच समभाग पानी के साथ लें ।

    बडो के लिए सुबह-दोपहर-शाम भोजन के बाद २-२ चम्मच समभाग पानी के साथ लें ।

  • UroGreen Syrup/यूरोग्रीन सिरप 200ml

    Description

    आयुर्वेद के विभिन्न ग्रंथो में किडनी एवं मूत्रमार्ग के विभिन्न रोगों के लिए औषधियां बताई गई है। इन सभी औषधियों का एक योग्य मिश्रण करके यूरोग्रीन सिरप बनाया गया है। मूत्र मार्ग के किसी भी प्रकार के रोगों के लिए यह उत्तम औषधि है। यूरोग्रीन सिरप किसी भी प्रकार के स्टोन में दे सकते है, जब क्रिएटिनिन लेवल बढ़ा हुआ होता है उस अवस्था में भी इसका सेवन बहोत ही लाभदायक होता है।

    लाभ:

    • इसके नियमित सेवन से मूत्र प्रवृत्ति नियमित होती है।
    • मूत्र जलन दूर होती है।
    • मूत्र में पीलापन, मूत्र मार्ग की पथरी, किडनी की पथरी इत्यादि में बहोत लाभदायक है।

     

    सेवन विधि:

    सुबह-दोपहर-शाम २-२ चम्मच समभाग पानी के साथ सेवन करे।

  • Sound Mind Syrup (Man Shanti)/साउंड माइंड सिरप (मन शांति)200ml

    Description

    Shastrokt (Vedic) Importance : Ayurveda texts describe various medicines which raise the ‘satva guna’ which is essential to treat psychosomatic illness reasons like anxiety, depression. It regulates the secretion of pituitary gland which further keeps the mind happy and cheerful.

    Why to Consume : To treat insomnia and to improve mental strength.

    Who Can Consume : Anyone

  • Pudin Jeera Syrup/पुदीन जीरा सिरप 200ml

    Description

    बाजार के बाकी बिकनेवाले सिरप में चीनी का उपयोग किया जाता है, जो शरीर के लिए हानिकारक है । जब की इस सिरप में प्राकृतिक खड़ी शक्कर का उपयोग क़िया गया है, जिसका कोई हानिकारक प्रभाव ना होने से निर्भयता से ली जा सकती है ।

    आयुर्वेद के ग्रंथों में बताया गया है की, हमारे शरीर का स्वास्थ्य हमारे किये हुए आहार-विहार के अनुरुप होता है। ‘ आरोग्यं भोजनाधीनम्‍ ’ अर्थात्‍ आरोग्य भोजन के आधीन होता है। हम जिस प्रकार के आहार का सेवन करते है, हमारा शरीर भी उसी प्रकार का स्वास्थ्य प्राप्त करता है। ‘ प्रायेणाहार वैषम्यादजीर्णं जायते नृणाम् ’ इस श्लोक द्वारा अष्टांगह्रदयम्‌ में बताया गया है की, परस्पर विरुद्ध आहार, अप्रमाण आहार और अकाल किया हुआ आहार अजीर्ण की उत्त्पति करता है। आज-कल बहुत सारे लोग बाजार से बासी, अखाद्य तैलयुक्त, कृत्रिम मसालों से युक्त आहार करते है। जिस के कारण हमारे पाचनक्रिया पर इसका बहुत दुष्प्रभाव होता है। आयुर्वेद ने पाचनक्रिया को अधिक महत्व दिया है क्योंकि पका हुआ अन्न ही समस्त शरीर का पोषण कर सकता है, अपक्व अन्न शरीरस्थ तीनों दोषों को प्रकुपित करके सभी रोगों को उत्तपन्न करते है। पाचनक्रिया में पाचक पित्त की बहुत अहम भूमिका रहती है। अपथ्य आहार-विहार के कारण पाचक पित्त अपना कार्य ठीक तरीके से नहीं कर सकता, जिसके कारण वात की उत्त्पति होती है। अत: वात और पित्त प्रकुपित होकर अजीर्ण, अग्निमांद्य, आनाह, अम्लपित्त, कब्ज, उदरशूल, आंत्रदाह, गूल्म आदि रोगों की उत्त्पति करते हैं। संस्कृति आर्य गुरुकुलम्‌ ने बनाया हुआ ‘पुदिन जीरा सिरप’ इन सभी रोगों में बहुत उपयोगी है।

    Ayurveda suggests that our health is what we eat. ‘ आरोग्यं भोजनाधीनम्‍ ’ which means good health is under food. ‘ प्रायेणाहार वैषम्यादजीर्णं जायते नृणाम्‍ ’ Shloka in Ashtang Hridayam, say indigestion is caused by fruits with conflicting symptoms and food eaten in an untimely manner. These days, a lot of people eat stale food from outside, non-eatable, full of oil, made using artificially spices. It puts an adverse affect on our stomach. Ayurveda has given much importance to digestive system because cooked food is what feeds the body. Undigested grains causes imbalance of all three Doshas and can be cause of various diseases.

    Digestive gases (semi liquid) are very important for digestion. Undisciplined eating habits don’t let digestive fluids work properly which causes Vaata. That is why Vaata and Pitta cause diseases like indigestion, low appetite, acidity, constipation, stomachache, kidney inflammation, etc. Sanskruti Arya Gurukulam’s “Pudin Jeera Syrup” is very beneficial in all these.

    लाभ :

    • पुदिन जीरा सिरप पाचन तंत्र के लिए एक उत्तम औेषधी है, पेट के सभी प्रकार के रोगों में यह बहोत लाभदायी है।
    • गर्भावस्था में पाचन कि गड़बड़ी होती है, बार बार उल्टी होती है। इसी परिस्थति में पुदीन जीरा सिरप भोजन के बाद सेवन करने से लाभ होता है।
    • पाचन तंत्र को सक्रिय करके मल प्रवृत्तियों को नियमित करता है।
    • सभी प्रकार के उदर रोगों में लाभदायी है।
    • किसी भी प्रकार के अजीर्ण के लिए भी यह एक उत्तम औषधि है।
    • यह सिरप प्राकृतिक खड़ी शक्कर से बनाया गया है, इसीलिए इसका कोई दुष्प्रभाव नहीं है।

    घटक:

    पुदीना: 15%
    जीरा: 15%
    अजवाइन तेल: 15%
    हींग: 10%
    सेंधा नमक: 10%
    काला नमक: 10%
    सतपुष्पा: 05%
    पुदीना सत्‌: 05%
    हरड़: 05%
    सोंठ: 05%
    सोंफ़: 05%

    सेवनविधि : सुबह-दोपहर-शाम भोजन के बाद २-२ चम्मच समभाग पानी के साथ लें।

    सेवनयोग्य व्यक्ति : १ साल से अधिक आयुवाला कोई भी व्यक्ति इसका सेवन कर सकता है।

  • Amaltas Triphala Syrup/अमलतास त्रिफला सिरप 200ml

    Description

    अमलतास-त्रिफला सिरप कब्ज के लिए उत्तम औषधि है।

    अमलतास को मृदु विरेचक अर्थात किसी भी प्रकार की हानि के बिना पेट को साफ करने वाला बताया गया है, तथा त्रिफला को भी उत्तम शोधक तथा रसायन बताया गया है।

    अमलतास और त्रिफला के संयोजन से संस्कृति आर्य गुरुकुलम् ने अमलतास-त्रिफला सीरप बनाया है, पेट को साफ करने में विशेष लाभदायक होता है।

  • Krishnavalyadi Syrup/कृष्णावल्यादि सिरप 200 ml

    Description

    विभिन्न प्रकार की गांठो के लिए तथा किसी भी प्रकार के कैंसर और अर्बुद के लिए अति उत्तम औषधि है। कृष्नावल्यादी यह एक दिव्य औषधि है जो गुजरात में पाई जाती हैं। अनेक शोध कार्य के बाद यह सिद्धध हुआ है कि यह दिव्य औषधि कर्करोग में यानी कैंसर रोग पर विशेष प्रभाव करती है।

    • वरुण” का प्रभाव विभिन्न प्रकार की गांठ तथा सूजन पर विशेष देखा गया है।
    • “कांचनार” का प्रभाव गांठ पर तथा सूजन पर विशेष रूप से देखा गया है।

    इस प्रकार की औषधियों का मिश्रण करके इस औषधि को बनाया गया है।

    सेवन विधि:
    सुबह-दोपहर एक-एक चम्मच पानी के साथ सेवन करना है।

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