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स्वर्णप्राशन आरम्भ करने का अगला शुभ

पुष्यनक्षत्र: 29 अक्टूबर

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  • Anu Tailam / अणु तैलं   – 10 ml & 30 ml (वर्षा के जल से निर्मित)

    अणु तैलं नस्य के रूप में प्रयोग हेतु अर्थात नाक में बूँद के रूप में डालने हेतु

    अणुतैलं नस्य लाभ: (स्त्रोत – चरकसंहिता)

    जो व्यक्ति शास्त्रोक्तविधि से समय पर नस्य का प्रयोग करता है उसके

    • आँख कान और नाक की शक्ति नष्ट नहीं हो पाती
    • सिर आदि के बाल एवं दाढ़ी मूँछ सफ़ेद अथवा कपिल (भूरे) वर्ण के नहीं होते और न ही गिरते है अपितु विशेष प्रकार से बढ़ने लगते है
    • मर्दनऐंठा – Torticollis, शिर: शूल – Headache, अर्दित – Facial Paralysis, हनुस्तंभ – Lock-Jaw, पीनस – Chronic Coryza, आधासीसी – Hemicrania, शिर: कंपः  जैसे रोगो में अत्यंत लाभकारी
    • इसके साथ शिर: कपाल से सम्बंधित शिराएं, संधियाँ, स्नायु और कण्डराएं इस तक के सेवन से तृप्त एवं बल को प्राप्त होती है
    • मुखमण्डल प्रसन्नता से भरा हुआ दीखता है
    • स्वर स्निग्ध, स्थिर तथा गंभीर हो जाता है
    • सभी ज्ञानेन्द्रियाँ निर्मल एवं बलसंपन्न हो जाती है
    • अचानक गले के ऊपर होने वाले रोग नहीं होते
    • वृद्धावस्था आने पर भी शिर: प्रदेश में बुढ़ापे का प्रभाव सबल नहीं हो पाता (जैसे – बाल सफ़ेद होना, चेहरे पर झुर्रियां पड़ना आदि)
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