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पुष्यनक्षत्र: 01 जुलाई

Mashtishk Rog Nashini / मस्तिष्क रोग नाशिनी (with Glass Dropper)

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यह मस्तिष्क से सम्बंधित रोगों के लिए लाभकारी है |

It is beneficial for diseases related to the brain.

बाहरी उपयोग में लाने हेतु निर्मित (नासिका)

Made for external use (as nasal drop)

पंचगव्य बूंद औषध (नासिका) बाहरी उपयोग के लिए बहुउपयोगी, दर्द में इससे मसाज भी कर सकते है

  1. यह घृत में बना है अत: यदि जमा हुवा है तो बोतल को गर्म जल में डूबकर गुनगुना कर लें और पूर्णतः तरल हो जाने पर ही प्रयोग करें
  2. नाक के दोनों छिद्रों (नासिका) में 2 से 3 बूंद डाल सकते है (उपयूक्त समय सुबह 11 बजे और रात्रि शयन से पूर्व है)
  3. मूलाधार में ¼ चम्मच लगा सकते है (उपयुक्त समय प्रातःकाल और सायंकाल मल त्यागने के बाद अंगुली डालकर गुदाद्वार पर अंदर तक लगाए।

Panchgavya ghrit in drop form for nasal is very useful for external use,  if required can also be used for massage for pain

  1. It contains Ghee, do not freeze and if it is frozen due to weather etc. then use warm water to melt it first before using. Only use when it's in pure liquid form.
  2. 2 to 3 drops for both the nostrils (nasal) (the appropriate time is 11 am and just before bedtime).
  3. You can apply 1/4 teaspoon at anus (the appropriate time is in the morning and in the evening, after passing stool and use finger to apply inside anus opening.
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यह मस्तिष्क से सम्बंधित रोगों के लिए लाभकारी है |

It is beneficial for diseases related to the brain.

बाहरी उपयोग में लाने हेतु निर्मित (नासिका)

Made for external use (as nasal drop)

पंचगव्य बूंद औषध (नासिका) बाहरी उपयोग के लिए बहुउपयोगी, दर्द में इससे मसाज भी कर सकते है

  • यह सिर से गले तक के रोगों में लाभकारी है।
  • इस घृत को दोनों नथुनों में थोड़ा सा लगाकर घर से बाहर निकलने पर अनेकों जीवाणु/विषाणुओं से बचने में सहायता मिलेगी।
  • बताए गए उपरोक्त लाभों के अतिरिक्त भी अनेकों अन्य अनगिनत लाभ हैं।
  • यह घृत में बना है अत: यदि जमा हुवा है तो बोतल को गर्म जल में डूबकर गुनगुना कर लें और पूर्णतः तरल हो जाने पर ही प्रयोग करें
  • नाक के दोनों छिद्रों (नासिका) में 2 से 3 बूंद डाल सकते है (उपयूक्त समय सुबह 11 बजे और रात्रि शयन से पूर्व है)
  • मूलाधार में ¼ चम्मच लगा सकते है (उपयुक्त समय प्रातःकाल और सायंकाल मल त्यागने के बाद अंगुली डालकर गुदाद्वार पर अंदर तक लगाए।

Panchgavya ghrit in drop form for nasal is very useful for external use,  if required can also be used for massage for pain

  1. It contains Ghee, do not freeze and if it is frozen due to weather etc. then use warm water to melt it first before using. Only use when it’s in pure liquid form.
  2. 2 to 3 drops for both the nostrils (nasal) (the appropriate time is 11 am and before bedtime).
  3. You can apply 1/4 teaspoon at anus (the appropriate time is in the morning and in the evening, after passing stool and use finger to apply inside anus opening.

Additional information

Weight 75 g

Customer Reviews

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P
Priyanka Sinha

Awesome product, really helped me in many problems like running nose etc.

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Anand Yadav

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umesh chand

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Vipin Aggarwal

It's wonderful

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Sunil Chauhan

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