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Amritprashan / अमृतप्राशनम (बच्चो के शरीर में से toxins निकाले)

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Product details

Products Key Feature(s) : Completely ayurvedic mantraushadhi (the medicine rasayana is made very potent and powerful by using sound energy and cosmic energy which is created by chanting vedic hymes and suktas when the medicine is being prepared), oral drops, available in user friendly and durable packing.

Description

Products Key Ingredients :

each 10 ml content.
Baheda ext 50 mg,
Vaj ext 100 mg,
Hingu ext 0.10 mg,
Haldi ext 100 mg,
Panch Gavya Ghrit 0.5 mg,
Honey 9.24 mg

Processed in: Rajat Bhasm, Thuja, Delphinium

Relevant Reference  :
हरिद्रामञ्जिष्ठासुवहासूक्ष्मैलापालिन्दीचन्दनकतकशिरीषसिन्धुवारश्लेष्मातका इति दशेमानि विषघ्नानि भवन्ति

Ayurved Vidhan : Swanubhoot (patent medicine)

Why To consume : These days toxins keep going in children’s body regularly, in the form of antibiotics, vaccine, inorganic food, junk food,etc. and polluted air and water. Amrutprashanam is made with combination of panacea ayurvedic medicines. It removes toxins and side effects of vaccination and thus is called ‘amrut’ (nector).

Who Can Consume : 8 to 10 drop once every day for age above 10 years. (morning or evening) for minimum 3 months after vaccination.

 

शरीर में कई प्रकार के विषैले और शरीर को हानि पहुंचाने वाले तत्व निकाले
जो गलत जीवनशैली, एंटीबायोटिक दवाओं, टीकाकरण, रसायन युक्त भोजन, जंक फ़ूड, दूषित हवा, पानी के कारण बच्चो के शरीर में  लगातार पहुंच रहे है
  • यदि टीका लग गया है तो उसके दुष्प्रभावों से बचने के लिए प्रयोग करें
  • रजत भस्म युक्त
  • टीका लगाने के बाद जो दुष्प्रभाव होते है एवं अन्य विष जो भोजन एवं वातावरण के कारण शरीर उसे शरीर से निष्काषित करता है

घटक (प्रति 10 ml):

  • बहेड़ा
  • वज
  • हिंगु
  • हल्दी
  • पंचगव्य घृत
  • मधु

क्यों सेवन करना है: 

आजकल शरीर में कई प्रकार के विषैले और शरीर को हानि पहुंचाने वाले तत्व लगातार पहुंच रहे है जिसके मुख्य कारण गलत जीवनशैली, एंटीबायोटिक दवाओं, टीकाकरण, रसायन युक्त भोजन, जंक फ़ूड, दूषित हवा, पानी आदि है।

अमृतप्राशनम ऐसी आयुर्वेदिक औषधियों से निर्मित है जो शरीर से उपरोक्त सभी करने से उत्पन्न तत्वों को शरीर से निकालने का कार्य करती है।

आयु:  10 वर्ष से ऊपर 8 से 10 बूँद प्रतिदिन दिन में एक बार (सुबह या शाम सूर्यास्त से पहले) 

वयस्क टीका लगने के बाद 3 महीने तक लगातार सेवन करें।

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