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स्वर्णप्राशन आरम्भ करने का अगला शुभ

पुष्यनक्षत्र: 29 अक्टूबर

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  • Calcium Drops – मंत्रौषधि कैल्शियम बूँद – 15 ml

    बाजार के चूने से कई गुना शुद्ध एवं गुणकारी

    गुणधर्म:

    • कैल्शियम की कमी को दूर करें
    • दांतो और हड्डियों को मज़बूत करें
    • नाख़ून की वृद्धि होती है
    • बच्चो और गर्भवती महिलाओ के लिए विशेष रूप से लाभदायक
    • शरीर में अस्थि धातु को संतुलित एवं स्थिर कर दर्द में लाभ करता है
    • इसके निर्माण में गंगाजल का प्रयोग किया गया है जिससे यह कई महीनो तक सुरक्षित रहता है

    शास्त्रोक्त महत्त्व:

    आयुर्वेद में 7 धातुओं में अस्थि नमक एक धातु होती है जिस से हड्डियों का और दांतो का निर्माण होता है।

    अस्थि धातु को पोषण देने के लिए आयुर्वेद में मोती के चूने का महत्त्व बताया गया है जो एक विशेष प्रकार का चूना होता है।

    साधारण चूने से पथरी होने की सम्भावना होती है परन्तु मोती के चूने से वह सम्भावना नहीं है।

    इस उत्पाद में मोती के चूने के साथ प्रवाल भस्म, गोदन्ती भस्म, कपर्दिका भस्म का मिश्रण कर यह ड्रॉप्स बनाई गई है।

    150.00
  • Mashtishk Rog Nashini / मस्तिष्क रोग नाशिनी (with Glass Dropper)

    यह मस्तिष्क से सम्बंधित रोगों के लिए लाभकारी है |

    It is beneficial for diseases related to the brain.

     

    बाहरी उपयोग में लाने हेतु निर्मित (नासिका)

    Made for external use in nostrils

     

    पंचगव्य बूंद औषध (नासिका) बाहरी उपयोग के लिए उपयोगी, दर्द में इससे मालिश भी कर सकते है

    1. यह सिर से गले तक के रोगों में लाभकारी है।
    2. इस घृत को दोनों नथुनों में थोड़ा सा लगाकर घर से बाहर निकलने पर अनेकों जीवाणु/विषाणुओं से बचने में सहायता मिलेगी।
    3. बताए गए उपरोक्त लाभों के अतिरिक्त भी अनेकों अन्य अनगिनत लाभ हैं।
    180.00
  • Mashtishk Rog Nashini मस्तिष्क रोग नाशिनी (New Refill pack)

    पंचगव्य घृत युक्त नासिका का रिफिल पैक

    यह मस्तिष्क से सम्बंधित रोगों के लिए लाभकारी है |

    It is beneficial for diseases related to the brain.

     

    बाहरी उपयोग में लाने हेतु निर्मित (नासिका)

    Made for external use in nostrils

     

    पंचगव्य बूंद औषध (नासिका) बाहरी उपयोग के लिए उपयोगी, दर्द में इससे मालिश भी कर सकते है

    1. यह घृत में बना है अत: यदि जमा हुवा है तो बोतल को गर्म जल में डूबकर गुनगुना कर लें और पूर्णतः तरल हो जाने पर ही प्रयोग करें
    2. नाक के दोनों छिद्रों (नासिका) में 2 से 3 बूंद डाल सकते है (उपयूक्त समय सुबह 11 बजे और रात्रि शयन से पूर्व है)
    3. मूलाधार में ¼ चम्मच लगा सकते है (उपयुक्त समय प्रातःकाल और सायंकाल मल त्यागने के बाद अंगुली डालकर गुदाद्वार पर अंदर तक लगाए।
    150.00

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