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स्वर्णप्राशन आरम्भ करने का अगला शुभ

पुष्यनक्षत्र: 10 अप्रैल

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  • Calcium Folic Acid (Veg) Capsules – कैल्शियम एवं फॉलिक एसिड (शाकाहारी) कैप्सूल – 30 Capsules

    कैल्शियम कैप्सूल

    महिला एवं पुरुष सभी के सेवन योग्य

    (महिलाओ के लिए फॉलिक एसिड का भी अच्छा स्त्रोत)

    कैल्शियम की कमी में अत्यंत लाभकारी

    हड्डी एवं दाँतो को मज़बूत करें

    कपर्दिका भस्म
    प्रवाल भस्म
    गोदन्ती भस्म
    संगजराहट भस्म
    मोती का चूना
    अमलकी रसायनं

    सेवन: एक या दो कैप्सूल दिन में तीन बार

    150.00240.00
  • Garbh Poshak Syrup / गर्भ पोषक सिरप – 200ml

    गर्भ पोषक सिरप

    गर्भावस्था में 1 से 9 महीने तक सेवनीय

    मात्रा: प्रतिदिन 2 – 2 चम्मच दिन में तीन बार भोजन के बाद सेवन करें

    जीवंती, शतावरी, शतपुष्पा जैसी गर्भ पोषक औषधियों का क्वाथ करके यह syrup बनाया जाता है । यह Chemical processed शुगर (चीनी) के बदले प्राकृतिक खड़ी शक्कर से बना संभवतः भारत का सर्व प्रथम सिरप है ।

    इस syrup के नियमित सेवन से गर्भ का विकास एवं पोषण होता है एवं गर्भावस्था में होनेवाली विविध समस्याओं से मुक्ति मिलती है । इसका स्वाद अच्छा होने के कारण यह आसानी से लिया जा सकता है । इससे उल्टी इत्यादि की समस्या नहीं होती है

    120.00
  • Garbh Poshak (Veg) Capsule / गर्भ पोषक (शाकाहारी) कैप्सूल – 30 Capsules

    गर्भावस्था में 1 से 9 महीने तक सेवनीय

    नागकेशर, बंगभस्म आमलकी, यष्टिमधु, विहारीकंद, शतावरी,

    *************

    आयुर्वेद में गर्भ और गर्भीणी दोनों का स्वास्थ्य अच्छा रह सके उसके लिए बहुत सारे उपाय बताये गए हैं । आयुर्वेद के ग्रंथो में, प्रतिमाह गर्भावस्था में गर्भ का विकास होता रहे और साथ-साथ गर्भीणी का स्वास्थ्य भी बना रहे इसलिए विभिन्न औषधियाँ बताई गई है, जैसे की शतावरी, विदारीकंद, नागकेसर जैसी औषधियाँ गर्भ का पोषण कारके गर्भस्थ शिशु के सर्व अंगो का विकास करती है और साथ-साथ गर्भीणी को शारीरिक एवं मानसिक शक्ति प्रदान करती है । वर्षों के संशोधन कार्य के बाद चिकित्सा में उपयुक्त “गर्भपोषक कैप्सूल” हमारे संस्कृति गर्भसंस्कार केन्द्र में बहुत लाभप्रद सिद्ध हुई है ।

    यह गर्भावस्था में प्रत्येक महीने में गर्भ का विकास तथा गर्भीणी के स्वास्थ्य का रक्षण करता है ।

    ब्राह्मी, शंखपुष्पी, जटामासी, जैसी औषधियों से गर्भीणी का मन शांत होकर गर्भस्थ शिशु का मानसिक विकास होता है ।

    यष्टिमधु, शतावरी जैसी औषधियों से गर्भीणी तथा गर्भ दोनों को पोषण मिलता है । गर्भावस्था में शक्ति प्रदान करता है, तथा कमजोरी को दूर करता है ।

    नागकेसर गर्भ का पोषण करता है और शक्ति संरक्षण का कार्य करता  है । गर्भावस्था में गर्भस्त्राव तथा गर्भपात होने से बचाता है ।

    अश्वगंधा, विदारी कंद जैसी औषधियाँ शक्ति का संचार करके अशक्ति को दूर करती है ।

    “गर्भपोषक कैप्सूल” गर्भाशय को मजबूत करती हैऔर बार-बार होनेवालें गर्भपात को रोकती है ।

    गर्भावस्था में होनेवालें विकारो या तकलीफों में भी लाभदायी है ।

     

    200.00
  • Mantroaushadhi Garbh Swarnprashanam – मंत्रौषधि गर्भ स्वर्णप्राशनम – गर्भावस्था हेतु विशेष – Specially for Pregnant Ladies (30ml)

    मंत्रौषधि गर्भ स्वर्णप्राशनम
    ******************
    शंखपुष्पी
    पिप्पली
    जटामंसी
    वज
    ब्राह्मी
    पंचगव्य घृत
    शहद
    स्वर्णभस्म और फल घृत युक्त

    गर्भ का रक्षण, पोषण एवं विकास करता है। गर्भिणी को सबल एवं स्वस्थ बनाता है

    मात्रा : 7 से 10 बूँद प्रतिदिन सुबह खाली पेट सेवन करें

    *************************

    गर्भावस्था में सुवर्ण की विशेष आवश्यक्ता होती है क्योंकि गर्भस्थ शिशु के मस्तिष्क के सम्पूर्ण विकास के लिए सुवर्ण बहुत आवश्यक है ।

    गर्भस्थ शिशु का शरीर अविरत विकसित होता रहता है तथा पाँचवें, छठ्ठेऔर सातवें महीने में मन-बुद्धि-ओज का विकास होता है । उस समय गर्भ सुवर्णप्राशनम् विशेष रुप से प्रभावी होता है । यह सुवर्णप्राशन फल घृतम् द्वारा process करके बनाया जाता है ।

    सम्पूर्ण भारत में केवल गुरुजी ने अपनी विशेष formula के आधार पर बनाकर यह अनेक गर्भवती महिलाओं को दिया गया है और इससे गर्भ के विकास में अनेक लाभ पाये गये हैं। जैसे शिशु की बुद्धि एवं मन का विकास, मस्तिष्क का विकास, कफ-वात-पित्त का संतुलन होना तथा बच्चों की प्रकृति स्वस्थ करने में बहुत लाभदायक सिद्ध होता है ।

     

    500.00
  • Mantroaushadhi Pain Killer Drops – मंत्रौषधि पेन किलर बूँद – 15ml

    मंत्रौषधि पेन किलर बूँद
    80 वात रोग, औषधि एक

    दुष्प्रभाव रहित

    उपयोग: जोड़ो के दर्द, वात रोग, माहवारी के दर्द, मधुमेह एवं रक्तचाप के रोगो में लाभदायक

    सेवन: 3 – 5 बूँद आधे गिलास पानी में , दिन में दो या तीन बार

    घटक:
    कलौंजी तेल
    ज्योतिष्मती तेल
    निर्गुन्डी तेल
    रसना
    गुगुल
    त्रिफला
    हल्दी

    150.00
  • GarbhPoshak Prashan (With Phal Ghrit) / गर्भ पोषक प्राशनम्  (फल घृत सहित) – 500gm

    गर्भ पोषक प्राशनम्  (फल घृत सहित)

    आयुर्वेद में बताई गई यह विभिन्न औषधियों, जैसे नागकेशर, बंगभस्म आमलकी, यष्टिमधु, विहारीकंद, शतावरी इत्यादि का संयोजन करके विशेष अवलेह बनाया जाता है, जो गर्भवती महिला एवं शिशु दोनों का संरक्षण करता है ।

    गर्भावस्था में 1 से 9 महीने तक सेवनीय

    आयुर्वेद में बताई गई यह विभिन्न औषधियों, जैसे ब्राह्मी, शंखपुष्पी, शतावरी इत्यादि का संयोजन करके विशेष अवलेह बनाया जाता है, जो गर्भवती महिला एवं शिशु दोनों का संरक्षण करता है ।

    Garbh Poshak Prashan: Ayurvedic Immunity Booster for Pregnant Ladies. Only pure Desi Gomata ghee is used in preparing this rasayana, instead of using any fat based ghee.

    500.00
  • Book: पुस्तक: – एक गाय की आत्मकथा (हिंदी) – लेखक : गिरीश पंकज

    गर्भ विज्ञान सम्बन्धी सर्व विषयो पर की जानकारी देती एकमात्र पुस्तक

    180.00200.00
  • Vaatrog Har Massage Oil/वातरोग हर मसाज ऑयल50ml

    Description

    CONTAINS : Each 500 mg Veg capsule

    Chandraprabha Vati: 140 mg

    Eladi Churna: 100 mg

    Trivikram Ras: 40 mg

    Shuddha Tankankshar: 40 mg

    Hajrul Yahood Bhasma: 80 mg

    Shuddha Shilajit: 40 mg

    Gokharu Ext. (Tribulus terrestros): 60 mg

    Lambdi beej kwath (Celosia argentea) : Q.S.

    लाभ :

    • किडनी स्टोन मूत्रमार्ग के रोग, पथरी (Stone) मूत्रमार्ग में जलन इत्यादि रोगोंमें उपयोगी है ।
    • मूत्रमार्ग में अवरोध को दूर करके मूत्र को साफ करता है ।
    • किडनी की सफाई करने की कार्यक्षमता को बढाकर मूत्रप्रवृति को नियमित करती है ।
    • मूत्रकृच्छ (रुक-रुककर मूत्र का आना) में यह औषध बहुत उपयोगी सिद्ध हुआ है ।
    • क्षार को दूर करके सम्पूर्ण मूत्रसंस्थान का शोधन करता है ।
    • प्रमेह रोग में यूरोग्रीन कैप्सूल उपयोगी है ।

    सेवनविधि :

    सुबह-दोपहर-शाम १-१ कैप्सूल पानी के साथ लें ।

    सेवनयोग्य व्यक्ति :

    उपरोक्त रोग से पीड़ित कोई भी व्यक्ति इसका सेवन कर सकता है ।

    Products Key Feature(s) : UTI problems

    AyurvedVidhan :  Aryabhishak, Rastantra Sar, Ashtang Hraday (Marshi Vagbhatt)

    Who Can Consume : Anyone who has any of these ailments

    Who Can Not Consume : Pregnancy

    160.00
  • Vita Shakti Capsules/ वीटा शक्ति कैप्सूल 30 Capsule

    Description

    Shastrokt (Vedic) Importance : Ayurveda text charak Samhita describes the ‘prajasthapak gana’ or a chapter dedicated for procreation. This section prescribes many medicines or medicinal herbs which are very useful for a healthy conception. Extracts of these prescribed medicinal herbs have been made into this capsule, specially for men.

    Ayurved Vidhan : Sushrut Samhita

    Why to Consume : Taking this capsule improves purified semen quality and sperm count.

    Who Can Consume : Anyone

    200.00
  • Ifeni Capsules/इफेनी कैप्सूल 30 Capsules

     

    Description

    CONTAINS :

    Shwas Kuthar Ras: 100 mg

    Sameera Pannaga Ras: 100 mg

    Abhrak Bhasma: 100 mg

    Dhatura Seed: 100 mg

    Kantkari Kshar: 50 mg

    Hing Niryas: 50 mg

    लाभ :

    • श्वासकुठार रस आयुर्वेद के रसतंत्रसार नामक ग्रंथ में बताया गया है । यह श्वास रोगों की अद्भुत औषधि है ।
    • कण्टकारी श्वास की उत्तम औषधि है और कास को भी ठीक करती है ।
    • वचा में उत्तम कंठ्य गुण होता है । यह कंठ सुधारता है, स्वर को ठीक करता है और कास को दूर करने में सहायता करता है ।
    • इसमें उपयुक्त अभ्रक भस्म को १००० बार पुट देकर तैयार करी जाती है, इसलिए यह सहस्त्रपुटी अभ्रक का गुण अन्य अभ्रक भस्म से हजार गुना अधिक होता है । यह सर्व रोगों का नाश करती है ।

    सेवनविधि :

    सुबह-दोपहर-शाम १-१ कैप्सूल पानी के साथ लें ।

    १२ साल से कम आयुवाले बच्चों को आधी मात्रा में औषध दें ।

    सेवनयोग्य व्यक्ति :

    १ साल से अधिक आयुवाला कोई भी व्यक्ति इसका सेवन कर सकता है ।

    Products Key Feature(s) : Asthametic problems, Whoopin cough, Old cough

    AyurvedVidhan : Aryabhishak, Rastantra Sar

    Who Can Consume : Anyone above one year of age can use it.

    Who Can Not Consume : pregnancy

    160.00
  • Lacta Grow Capsules/लैक्टा ग्रो कैप्सूल 30Capsules

    Description

    स्तन्य विशुद्ध होने से बच्चों को अनेक घातक रोग होने की संभावना है। साथ साथ प्रसूता के स्वास्थ्य पर भी बुरा प्रभाव पड़ता है। काश्यप संहिता में विशुद्ध स्तन्य से होने वाले विविध रोगों की सूची दी गयी है।

    हारीत संहिता नामक ग्रंथ में पांच प्रकार के क्षीर दोषों को दूर करने के लिए आयुर्वेद में विभिन्न औषधियां बताई गई है।

    ऐसी औषधियों में शतावरी , जीवन्ती, अश्वगंधा इत्यादि मुख्य है। ऐसी औषधियां जो माता के दूध को न केवल शुद्ध करती है अपितु बढ़ाती भी है।
    ऐसी औषधियों का मिश्रण करके संस्कृति आर्य गुरुकुलम् ने Lacta Grow – Capsules बनाई है जो प्रसूति के बाद प्रथम दिन से ही शुरू करनी है।

    लाभ:

    • माता के दूध की शुद्धि करके वृद्धि करता है।
    • माता की दूध बनाने की प्रक्रिया को सरल एवं स्वस्थ बनाता है।
    200.00
  • Leucowin Capsules/ल्यूकोविन कैप्सूल 30 Capsule

    Description

    Shastrokt (Vedic) Importance : Ayurveda texts describe a number of medicines for cleansing and purifying the uterus in women. Taking such medicines regulations menstruation cycle and the rajah dhatu improves and purifies in the female body. The medicine made with combination of valuable herbs like shataavari, ashok, lodhra is very beneficial for reproductive system related diseases.

    Why to Consume : Helps reduce menstrual pain, cramps and very useful for Leucorrhoea.

    Who Can Consume : Anyone

    150.00
  • Garbha Dharak Yog/गर्भ धारक योग 20 capsule

    Description

    Products Key Ingredients : Javitri, jaayphal, rasasindoor, rajat bhasma

    Products Key Feature(s) : This is a brilliant yoga prescribed for conception.

    Indian Ayurved Vidhan : Rasa tantra saar grantha

    Why To consume : For successful conception.

    Who Can Consume : Only those ladies who are willing/trying to conceive a child. To be taken from fourth day after the monthly menstrual cycle completes for the next 10 days.

    Who Can Not Consume : No one else than the one advised to consume.

    सेवनविधि :

    सुबह-दोपहर-शाम भोजन के बाद 1-1 कैप्स्यूल पानी के साथ लें।

    300.00

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